स्वयं को संगठन से जोड़िये
*************एक वन में बहुत बडा अजगर रहता था। वह बहुत अभिमानी और अत्यंत क्रूर था। जब वह अपने बिल से निकलता तो सब जीव उससे डरकर भाग खड़े होते। उसका मुंह इतना विकराल था कि खरगोश तक को निगल जाता था।
एक बार अजगर शिकार की तलाश में घूम रहा था। सारे जीव अजगर को बिल से निकलते देखकर भाग चुके थे । जब अजगर को कुछ न मिला तो वह क्रोधित होकर फुफकारने लगा और इधर-उधर खाक छानने लगा। वहीं निकट में एक हिरणी अपने नवजात शिशु को पत्तियों के ढेर के नीचे छिपाकर स्वयं भोजन की तलाश में दूर निकल गई थी।
अजगर की फुफकार से सूखी पत्तियां उडने लगी और हिरणी का बच्चा नजर आने लगा। अजगर की नजर उस पर पड़ी हिरणी का बच्चा उस भयानक जीव को देखकर इतना डर गया कि उसके मुंह से चीख तक ना निकल पाई। अजगर ने देखते-ही-देखते नवजात हिरण के बच्चे को निगल लिया। तब तक हिरणी भी लौट आई थी, पर वह क्या करती ? आंखों में आंसू भरके दूर से अपने बच्चे को काल का ग्रास बनते देखती रही। हिरणी के शोक का ठिकाना न रहा। उसने किसी-न किसी तरह अजगर से बदला लेने की ठान ली।
हिरणी की एक नेवले से दोस्ती थी। शोक में डूबी हिरणी अपने मित्र नेवले के पास गई और रो-रोकर उसे अपनी दुखभरी कथा सुनाई। नेवले को भी बहुत दु:ख हुआ। वह दुख-भरे स्वर में बोला मित्र, मेरे बस में होता तो मैं उस नीच अजगर के सौ टुकडे कर डालता। पर क्या करें, वह छोटा-मोटा सांप नहीं है, जिसे मैं मार सकूं वह तो एक अजगर है। अपनी पूंछ की फटकार से ही मुझे अधमरा कर देगा। लेकिन यहां पास में ही चीटिंयों की एक बांबी हैं। वहां की रानी मेरी मित्र हैं।
उससे सहायता मांगनी चाहिए। हिरणी निराश स्वर में विलाप किया “पर जब तुम्हारे जितना बडा जीव उस अजगर का कुछ बिगाडने में समर्थ नहीं हैं तो वह छोटी-सी चींटी क्या कर लेगी?” नेवले ने कहा 'ऐसा मत सोचो। उसके पास चींटियों की बहुत बडी सेना हैं। संगठन में बडी शक्ति होती हैं।' हिरणी को कुछ आशा की किरण नजर आई। नेवला हिरणी को लेकर चींटी रानी के पास गया और उसे सारी कहानी सुनाई। चींटी रानी ने सोच-विचार कर कहा 'हम तुम्हारी सहायता अवश्य करेंगे ।
हमारी बांबी के पास एक संकरीला नुकीले पत्थरों भरा रास्ता है। तुम किसी तरह उस अजगर को उस रास्ते पर आने के लिए मजबूर करो। बाकी काम मेरी सेना पर छोड़ दो। नेवले को अपनी मित्र चींटी रानी पर पूरा विश्वास था इसलिए वह अपनी जान जोखिम में डालने पर तैयार हो गया। दूसरे दिन नेवला जाकर सांप के बिल के पास अपनी बोली बोलने लगा। अपने शत्रु की बोली सुनते ही अजगर क्रोध में भरकर अपने बिल से बाहर आया। नेवला उसी संकरे रास्ते वाली दिशा में दौड़ाया।
अजगर ने पीछा किया। अजगर रुकता तो नेवला मुड़कर फुफकारता और अजगर को गुस्सा दिलाकर फिर पीछा करने पर मजबूर करता। इसी प्रकार नेवले ने उसे संकरीले रास्ते से गुजरने पर मजबूर कर दिया। नुकीले पत्थरों से उसका शरीर छिलने लगा। जब तक अजगर उस रास्ते से बाहर आया तब तक उसका काफ़ी शरीर छिल गया था और जगह-जगह से ख़ून टपक रहा था।
उसी समय चींटियों की सेना ने उस पर हमला कर दिया। चींटियां उसके शरीर पर चढकर छिले स्थानों के नंगे मांस को काटने लगीं। अजगर तडप उठा। अपने शरीर से खुन पटकने लगा जिससे मांस और छिलने लगा और चींटियों को आक्रमण के लिए नए-नए स्थान मिलने लगे। अजगर चींटियों का क्या बिगाडता? वे हजारों की गिनती में उस पर टूट पढ़ रही थीं। कुछ ही देर में क्रूर अजगर तडप-तडपकर दम तोड दिया।
सीख- संगठन शक्ति बड़े-बड़ों को धूल चटा देती है। क्योंकि
संगठन में - कायदा नहीं, व्यवस्था होती है।
संगठन में - सुचना नहीं, समझ होती है।
संगठन में - क़ानून नहीं, अनुशासन होता है।
संगठन में - भय नहीं, भरोसा होता है।
संगठन में - शोषण नहीं, पोषण होता है।
संगठन में - आग्रह नहीं, आदर होता है।
संगठन में - संपर्क नहीं, सम्बन्ध होता है।
संगठन में - अर्पण नहीं, समर्पण होता है।
इस लिए स्वयं को संगठन से जोड़े रखें।
संगठन सामूहिक हित के लिए होता है।
पिता बेटे को डॉक्टर बनाना चाहता था।
बेटा इतना मेधावी नहीं था कि NEET क्लियर कर लेता।
इसलिए दलालों से MBBS की सीट खरीदने का जुगाड़ किया ।
ज़मीन, जायदाद, ज़ेवर सब गिरवी रख के 35 लाख रूपये दलालों को दिए, लेकिन अफसोस वहाँ धोखा हो गया।
अब क्या करें...?
लड़के को तो डॉक्टर बनाना है कैसे भी...!!
फिर किसी तरह विदेश में लड़के का एडमीशन कराया गया, वहाँ लड़का चल नहीं पाया।
फेल होने लगा..
डिप्रेशन में रहने लगा।
रक्षाबंधन पर घर आया और घर में ही फांसी लगा ली।
सारे अरमान धराशायी.... रेत के महल की तरह ढह गए....
20 दिन बाद माँ-बाप और बहन ने भी कीटनाशक खा कर आत्म-हत्या कर ली।
अपने बेटे को डॉक्टर बनाने की झूठी महत्वाकांक्षा ने पूरा परिवार लील लिया।
माँ बाप अपने सपने, अपनी महत्वाकांक्षा अपने बच्चों से पूरी करना चाहते हैं ...
मैंने देखा कि कुछ माँ बाप अपने बच्चों को Topper बनाने के लिए इतना ज़्यादा अनर्गल दबाव डालते हैं
कि बच्चे का स्वाभाविक विकास ही रुक जाता है।
आधुनिक स्कूली शिक्षा बच्चे की Evaluation और Gradening ऐसे करती है, जैसे सेब के बाग़ में सेब की खेती की जाती है।
पूरे देश के करोड़ों बच्चों को एक ही Syllabus पढ़ाया जा रहा है ..
For Example -
जंगल में सभी पशुओं को एकत्र कर सबका इम्तिहान लिया जा रहा है और पेड़ पर चढ़ने की क्षमता देख कर Rank निकाली जा रही है।
यह शिक्षा व्यवस्था, ये भूल जाती है कि इस प्रश्नपत्र में तो बेचारा हाथी का बच्चा फेल हो जाएगा और बन्दर First आ जाएगा।
अब पूरे जंगल में ये बात फैल गयी कि कामयाब वो है जो झट से पेड़ पर चढ़ जाए।
बाकी सबका जीवन व्यर्थ है।
इसलिए उन सब जानवरों के, जिनके बच्चे कूद के झटपट पेड़ पर न चढ़ पाए, उनके लिए कोचिंग Institute खुल गए, वहां पर बच्चों को पेड़ पर चढ़ना सिखाया जाता है।
चल पड़े हाथी, जिराफ, शेर और सांड़, भैंसे और समंदर की सब मछलियाँ चल पड़ीं अपने बच्चों के साथ, Coaching institute की ओर ........
हमारा बिटवा भी पेड़ पर चढ़ेगा और हमारा नाम रोशन करेगा।
हाथी के घर लड़का हुआ .......
तो उसने उसे गोद में ले के कहा- "हमरी जिन्दगी का एक ही मक़सद है कि हमार बिटवा पेड़ पर चढ़ेगा।"
और जब बिटवा पेड़ पर नहीं चढ़ पाया, तो हाथी ने सपरिवार ख़ुदकुशी कर ली।
अपने बच्चे को पहचानिए।
वो क्या है, ये जानिये।
हाथी है या शेर ,चीता, लकडबग्घा , जिराफ ऊँट है
या मछली , या फिर हंस , मोर या कोयल ?
क्या पता वो चींटी ही हो ?
और यदि चींटी है आपका बच्चा, तो हताश निराश न हों।
चींटी धरती का सबसे परिश्रमी जीव है और अपने खुद के वज़न की तुलना में एक हज़ार गुना ज्यादा वजन उठा सकती है।
इसलिए अपने बच्चों की क्षमता को परखें और जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करें.... ना कि भेड़ चाल चलाते हुए उसे हतोत्साहित करें ......
SAVE HUMAN BEHAVIOR FIRST...
Parents love your kids as they are🙏
"क्योंकि किसी को शहनाई बजाने पर भी भारत रत्न से नवाज़ा गया है"
जरूरी है धन्यवाद कहना
धन्यवाद यह शब्द बोलने और देखने में छोटा लगता है परतु इसके फायदे काफी है जब कोई भी छोटा ससा बच्चा काम करता है और काम को पूरा करने के बाद आप उसको थैक्यू कहती है तो बच्चें के चेहरे पर खुशी आती है और हम इस ख़ुशी को देखकर हम भी प्रसन्न होते है अगर आप थैक्यू कहने की आदत अपने बच्चों को बचपन से ही डालेगी तो उनके व्यकित्त्व पर निखार आएगा और उनका व्यवहार भी अच्छा होगा
शब्द छोटा सा लाभ काफी
चाहे धन्यवाद शब्द छोटा सा है पर यह शब्द कही न कही आपके व्यकितत्व को भी उभारते है मार्केटिग या सेल्स के लोगों को विशेष - तोर पर इसके लिए तैयार करने के पीछे भी यही कारण है कि धन्यवाद बोलने से उनका गुडविल बनता है और लोग उनकी सुनने के लिए आक्रर्षित होते है
कहना न भूले धन्यवाद
कई बार हम अपना काम किसी आदमी या भाई बहन से करवाते है पर हम अपनों को धन्यवाद बोलना जरूरी नही समझते क्योंकि हम सोचते है कि यह अपने है और इनको धन्यवाद क्यू बोंले पर यह गलत है कोई भी हो आप उन्हें धन्यवाद जरुर कहें इससे आपकी सोच और व्यवहार पर भी काफी प्रभाव पड़ता है जब आप धन्यवाद बोलते है तो सामने वाले की नजर में आपकी इज्जत भी बढती है
कहें क्यों
यदि आपके घर में आपकी कोई जरूरी चीज खराब हो जाती है और उसके बिना आपका कोई भी काम नही हो सकता या फिर आपकी बीच
सड़क में गाड़ी खराब हो जाती है और कोई मैकेनिक ने मिले तो आपका पूरा दिन खराब हो जाएगा और आप चाहकर भी पुरे दिन को बेकार होने से नही रोक सकते है आपके पास पैसे है और साधन भी है परतु उस काम को उसका जानकार ही कर सकता है उस वक्त आपके लिए उस इंसान दी अहमियत बढ़ जाती है लेकिन जब वह आपका काम करने जाता है तो आप पैसा देकर अपना फर्ज पूरा क्र देते है ऐसा नही हमे उन्हें धन्यवाद कहन तो बनता है
विद्यार्थी का शुरुआती जीवन कैसे हो । उनको किन बातों का ध्यान रखना होगा जरुर जानें
आपके जीवन का ये महत्वपूर्ण पडाव है। आपको हमारे द्वारा लिखी गई बातें बड़े काम की होंगी पर आपको बता दें कि जो लिखा है, उसको आप ने अपने जीवन में ग्रहण भी करना है। विद्यार्थी जीवन किसी भी व्यक्ति के जीवन का महत्त्वपूर्ण काल होता है । इसी काल पर व्यक्ति का संपूर्ण भविष्य निर्भर करता है । इस काल का सदुपयोग करने वाले विद्यार्थी अपने शेष जीवन को आरामदायक और सुखमय बना सकते हैं ।
इस काल को व्यर्थ के कार्यों में नष्ट करने वाले विद्यार्थी अपने भविष्य को अंधकारमय बना देते हैं । विद्यार्थी जीवन में ही व्यक्ति के चरित्र की नींव पड़ जाती है । अत: इस जीवन में बहुत सोच-समझकर कदम उठाने की जरूरत होती है ।
विद्यार्थियों को इस अवधि में अपनी शिक्षा स्वास्थ्य खेल-कूद और व्यायाम का समुचित ध्यान रखना चाहिए । उन्हें परिश्रमी और लगनशील बनना चाहिए । इस काल में स्वाध्याय को सफलता का मूलमंत्र मानना चाहिए । उन्हें हर प्रकार की बुरी संगति से बचना चाहिए । उन्हें नम्र बने रहकर विद्या ग्रहण करने का प्रयास करना चाहिए । उपर्युक्त बातों को ध्यान में रखकर विद्यार्थी जीवन को सफल बनाया जा सकता है ।
अगर आपका बच्चा भी पहली बार स्कूल जा रहा तो, अपने बच्चे के सुनहरे भविष्य के लिए सिखाएं ये जरुरी बातें !
अपने शरीर की सफाई:
मेहनत की आदत ताकि, आगे चलकर कतराए नहीं:
उनको सिखाएं कि अपनी चीजों को संभाला कर कैसे रखना:
बड़े-बुजुर्गों का आदर:
बच्चों को धैर्य, सब्र रखना सिखाएं :
छोटा हो या बड़ा सबसे अच्छे से बात करना :
इंसान के जीवन मे दूसरे पड़ाव को विधार्थी कहते है? आओ जाने अपने विधार्थी जीवन
को कैसे सफल बनाएं .....
इंसान के जीवन मे दूसरे पड़ाव को विधार्थी कहते है? आओ जाने अपने विधार्थी जीवन को कैसे सफल बनाएं .....
सभी के जीवन मे अनेक पड़ाव पड़ते है। और बचपन के बाद इंसान के
जीवन मे दूसरा पड़ाव स्टूडेंट की लाइफ ही होती है। इन दिनों स्टूडेंट को पढ़ाई के साथ
ही इंजॉयमेंट का होना भी बहुत जरुरी है और इसके लिए स्टूडेंट को टाइमटेबल के मुताबिक
चलना आवश्यक है। स्टूडेंट की लाइफ इंसान की लाइफ का सबसे जटिल और महत्वपूर्ण हिस्सा
होता है।
सुबह टाइम से उठना जरुरी है :-
किसी भी सफल इंसान की यह आदत होती है। की वह सुबह टाइम से उठे इसलिए स्टूडेंट की दिन चार्य मे यह जरुरी है। की वह सुबह जल्दी उठे इसके लिए रात को जल्दी सोना भी जरुरी है। सुबह जल्दी उठने से सुबह की सकारात्मक ऊर्जा मिलेगी व माइंड फ्रेश रहता है। स्टूडेंट को अपने बड़ो का आदर सम्मान करना भी जरुरी है। इससे वह अपनी लाइफ को सही तरीके से जी सकते है।
स्टूडेंट की लाइफ मे इंजॉयमेंट का होना जरुरी :-
यह तो सभी इंसानो की लाइफ मे जरुरी है। कि वह अपनी लाइफ को इंजॉयमेंट
से जियें और इसी के साथ स्टूडेंट की लाइफ मे भी इंजॉयमेंट का होना बहुत जरुरी है। स्टूडेंट
अपने इंजॉयमेंट के लिए किसी पार्टी या ट्रिप पर जाना अधिक पसंद करते है। स्टूडेंट को
अपनी नीदं पूरा करना बहुत जरुरी है।
स्टूडेंट अपना काम टाइम से पूरा करे :-
स्टूडेंट के जीवन का यह कर्तव्य होता है। की वह अपने जीवन के
सभी काम टाइम से पूरा करे। यह एक अच्छे स्टूडेंट की पहचान होती है। स्टूडेंट की लाइफ
मे अनेक कार्य होते है। स्टूडेंट की सोच हमेशा पॉजिटिव होनी चाहिए। स्टूडेंट खुद को
हमेशा अनुशासन में रखे। स्टूडेंट को हमेशा एक्टिव रहना चाहिए।




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